PM Viksit Gram Swaraj Yojana: ₹7,395 करोड़ से पंचायतें होंगी मज़बूत
हिंदी में एक पुरानी कहावत है - "बूँद-बूँद से घड़ा भरता है।" देश का विकास भी ऐसे ही होता है। जब हर गाँव मज़बूत होगा, तभी भारत मज़बूत होगा। इसी सोच के साथ केंद्र सरकार ने एक नई योजना को मंज़ूरी दी है।
प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना (PM Viksit Gram Swaraj Yojana - PM VGSY) को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 28 अक्टूबर 2026 को मंज़ूरी दी। इस योजना पर कुल ₹7,395.55 करोड़ ख़र्च होंगे। इसका मक़सद ग्राम पंचायतों को अपनी योजना ख़ुद बनाने, अपने पैसे का सही हिसाब रखने और गाँव के लोगों तक बेहतर सेवा पहुँचाने लायक बनाना है।
PM Viksit Gram Swaraj Yojana क्या है?
यह एक केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) है। यानी इसका ख़र्च केंद्र और राज्य मिलकर उठाएँगे। योजना पंचायती राज मंत्रालय के तहत चलेगी।
मंत्रिमंडल के फ़ैसलों की जानकारी केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी। उन्होंने इसे एक "paradigm change" यानी सोच में बड़ा बदलाव बताया। अब तक कई योजनाओं में ऊपर से तय होता था कि गाँव में क्या काम होगा। इस योजना में ज़ोर इस बात पर है कि पंचायतें ख़ुद तय करें कि उनके गाँव को क्या चाहिए।
पंचायती राज मंत्रालय के आधिकारिक बयान में इसे विकसित भारत के राष्ट्रीय विज़न से जुड़ी "next-generation governance transformation initiative" कहा गया है।
कितना पैसा, कितने साल के लिए?
- कुल राशि: ₹7,395.55 करोड़
- केंद्र का हिस्सा: ₹4,869.48 करोड़
- राज्यों का हिस्सा: ₹2,526.07 करोड़
- अवधि: 2026-27 से 2030-31 तक, यानी पाँच साल
यह अवधि सोलहवें वित्त आयोग (Sixteenth Finance Commission) की अवधि के साथ चलेगी। इसका फ़ायदा यह है कि पंचायतों को वित्त आयोग से मिलने वाले अनुदान का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी।
किसे मिलेगा फ़ायदा?
योजना देश की 2.55 लाख से ज़्यादा पंचायतों और पारंपरिक स्थानीय निकायों (traditional local bodies) को कवर करेगी। जिन इलाक़ों में पंचायतें नहीं हैं, वहाँ के पारंपरिक निकाय भी इसमें शामिल होंगे। यह योजना सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगी।
इसमें लगभग 32 लाख चुने हुए जनप्रतिनिधि, जैसे सरपंच, प्रधान और वार्ड सदस्य, के साथ पंचायत कर्मचारी भी शामिल होंगे। पर इसका असली फ़ायदा गाँव के आम लोगों को होगा। जब पंचायत अच्छी योजना बनाएगी और पैसे का सही हिसाब रखेगी, तो सड़क, पानी, सफ़ाई जैसे काम बेहतर होंगे।
योजना के पाँच मुख्य हिस्से
1. प्रशिक्षण (Capacity Building)
चुने हुए जनप्रतिनिधियों को हर साल सामान्य और विशेष प्रशिक्षण मिलेगा। इसमें स्थानीय योजना बनाना, संसाधनों का सही इस्तेमाल और नागरिकों से अच्छा संवाद सिखाया जाएगा।
2. ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP)
हर साल लगभग 2.55 लाख ग्राम पंचायत विकास योजनाएँ (Gram Panchayat Development Plan) eGramSwaraj पोर्टल पर बनेंगी। इनमें गाँव की ज़रूरतें, केंद्र और राज्य के विभागों के काम और उपलब्ध पैसा, सब एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर होंगे।
3. ऑनलाइन ऑडिट
हर साल कम से कम 2.55 लाख ऑनलाइन ऑडिट प्लान AuditOnline के ज़रिए बनेंगे। समय पर ऑडिट होगा। हिसाब-किताब बेहतर होगा और जनता के सामने जानकारी रखी जाएगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी।
4. पंचायत की अपनी कमाई
योजना का एक लक्ष्य है कि पंचायतें वित्त आयोग के अनुदान का बेहतर इस्तेमाल करें और अपनी आय (own-source revenue) भी बढ़ाएँ। इससे पंचायतें आत्मनिर्भर बनेंगी।
5. जन-जागरूकता
ग्राम सभा, पंचायत मंच और डिजिटल माध्यमों से जागरूकता अभियान चलेंगे। हर अभियान का लक्ष्य कम से कम 1 करोड़ नागरिकों तक पहुँचना है।
योजना कैसे लागू होगी?
राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश हर साल अपनी कार्य योजना (Annual Action Plan) भेजेंगे। एक केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (Central Empowered Committee) इन योजनाओं की जाँच करके मंज़ूरी देगी।
एक ख़ास बात यह है कि इस योजना में कोई स्थायी पद नहीं बनाया जाएगा। ज़रूरत के हिसाब से राज्य, ज़िला और ब्लॉक स्तर पर अनुबंध (contract) पर तकनीकी कर्मचारी रखे जाएँगे। इससे सरकारी ख़र्च पर स्थायी बोझ नहीं बढ़ेगा।
गाँव के आम आदमी के लिए इसका मतलब
मान लीजिए आपके गाँव में नाली की समस्या है। अब तक कई बार ऐसा होता था कि पंचायत के पास पैसा तो होता था, पर सही योजना और तकनीकी जानकारी नहीं होती थी। इस योजना के बाद सरपंच और पंच प्रशिक्षित होंगे। योजना ऑनलाइन बनेगी। ख़र्च का ऑडिट समय पर होगा।
आप भी इसमें हिस्सा ले सकते हैं। ग्राम सभा की बैठक में जाइए। अपने गाँव की ज़रूरत बताइए। eGramSwaraj पोर्टल पर आप अपनी पंचायत की योजना और ख़र्च की जानकारी देख सकते हैं।
महात्मा गांधी ने ग्राम स्वराज का सपना देखा था। 73वें संविधान संशोधन ने पंचायतों को संवैधानिक दर्जा दिया। अब यह योजना उस व्यवस्था को डिजिटल और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक मज़बूत क़दम है।
मुख्य बातें
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 28 अक्टूबर 2026 को PM Viksit Gram Swaraj Yojana को मंज़ूरी दी।
- कुल ख़र्च ₹7,395.55 करोड़; केंद्र ₹4,869.48 करोड़ और राज्य ₹2,526.07 करोड़ देंगे।
- अवधि 2026-27 से 2030-31 तक।
- 2.55 लाख से ज़्यादा पंचायतें और लगभग 32 लाख जनप्रतिनिधि शामिल।
- eGramSwaraj पर विकास योजना और AuditOnline से ऑनलाइन ऑडिट।
- कोई स्थायी पद नहीं, ज़रूरत के हिसाब से अनुबंध पर कर्मचारी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
PM Viksit Gram Swaraj Yojana का कुल बजट कितना है?
इस योजना का कुल बजट ₹7,395.55 करोड़ है। यह 2026-27 से 2030-31 तक पाँच साल के लिए है।
क्या इस योजना में आम लोगों को सीधे पैसा मिलेगा?
नहीं। यह व्यक्तिगत लाभ की योजना नहीं है। इसमें पंचायतों को प्रशिक्षण, योजना बनाने और ऑडिट के लिए मदद मिलेगी। इसका फ़ायदा गाँव के बेहतर विकास के रूप में लोगों तक पहुँचेगा।
अपनी पंचायत की योजना कहाँ देख सकते हैं?
ग्राम पंचायत विकास योजना की जानकारी eGramSwaraj पोर्टल पर देखी जा सकती है। आप ग्राम सभा की बैठक में भी इसकी जानकारी पा सकते हैं।
आपके लिए सवाल: भारत में पंचायतों को संवैधानिक दर्जा किस संविधान संशोधन से मिला था, और यह किस साल लागू हुआ? अपना जवाब कमेंट में लिखिए।
गाँव और देश से जुड़ी ऐसी ही आसान जानकारी के लिए YouTube पर समझो भारत को सब्सक्राइब करें और हमारा WhatsApp Channel भी फ़ॉलो करें।
स्रोत: PTI (DT Next, Daily Excelsior), Telangana Today, पंचायती राज मंत्रालय का आधिकारिक बयान (रिपोर्टों के अनुसार)
समझो भारत, आगे बढ़ो भारत।
देश को समझिए, समझो भारत के साथ।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें